Home PTI रोजगार और पर्यावरण के साथ आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर भारत- अभिजीत सिन्हा

रोजगार और पर्यावरण के साथ आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर भारत- अभिजीत सिन्हा

चंडीगढ़ मंगलवार 13 अक्टूबर – हरजिंदर चौहान संवादाता, सभी-समानता

वैश्विक आपदा में अवसर ढूंढने का जो आह्वान प्रधान मंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत के लिए दिया, उसे पर्यावरण और रोजगार से जोड़ते हुए तकनीकी पायलट करने वाली संस्था अस्सार से 30000 इलेक्ट्रिक बाईकों को होम डिलीवरी में उतारने के लिए ई-बाइकगो से साझेदारी की, जिसके पहले चरण में 3000 इलेक्ट्रिक वाहन क्रमशः दिल्ली में 900, मुंबई में 700, बैंगलोर में 700, पुणे में 200, अमृतसर में 150, हैदराबाद में 150 और जयपुर में 200 इस तिमाही में उतरने का लक्ष्य है.

Ease of Doing Program Director Abhijeet Sinha with MSME Minister Govt Of India Sri. Pratap Chandra Sarangi at Udyog Bhawan.
Abhijeet Sinha – Director EoDB at ASSAR

कोरोना आपदा के समय लॉकडाउन से होम डिलीवरी की संख्या में भारी बढ़ोतरी आयी और ये बढ़त लॉकडाउन खुलने के बाद भी बनी हुई है क्योकि लोग इस नयी सुविधा के आदि हो गए हैं और नए वाहनों के मांग को यदि समय से इलेक्ट्रिक वाहनों द्वारा पूरा नहीं किया गया तो डीजल पेट्रोल से चलने वाले वाहनों से ईंधन की खपत और शहरों का पर्यावरण और प्रदूषित होगा। अस्सार के कंट्री डायरेक्टर और इज आफ डूइंग बिजनेस के कार्यक्रम निदेशक अभिजीत सिन्हा ने बताया की इस पहल से सिर्फ प्रदूषण पर रोक के साथ रोजगार के भी अवसर बनते है प्रत्येक 30 दुपहिया इलेक्ट्रिक वाहन पर लगभग 100 लोगों को रोजगार मिलता है और 30000 वाहनों के आने से हर चरण में लगभग 100000 लोगों को काम मिलेगा। देश में 3 करोड़ दुपहिया वाहन फ़िलहाल होम डिलीवरी में लगे है जिन्हे 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के सरकार के मंशा में ये पहल बहुत कारगर साबित होगी।

इस साझेदारी के तहत अस्सार की ईओडीबी टीम और ईबाइकगो मिलकर भिन्न ई-कामर्स और लॉजिस्टिक कंपनियों जैसे अमैजन, बिग बास्केट, स्विग्गी आदि में इलेक्ट्रिक बाइक की तैनाती करेंगे। इसमें माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) का समर्थन शामिल है जो भिन्न सरकारी योजनाओं और सरकारी / निजी बैंकों के माध्यम से माइक्रो उपक्रमों का बेहतर क्रेडिट सुविधाओं, वित्त और बैंक गारंटी से सशक्तिकरण करता रहा है।

प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान का प्रतिउत्तर देते हुए कई संस्थाओं ने प्रयास किये जिसमे आसार की ये पहल बहुत बड़ा प्रयास है – प्रताप चंद्र सारंगी

ई-मोबिलिटी स्टार्टअप ईबाइकगो और एडवांस्ड सर्विसेज फॉर सोशल एंड एडमिस्ट्रेटिव रीफॉर्म्स (अस्सार) के बीच रणनीतिक गठजोड़ का स्वागत करते हुए और इसके लिए बधाई देते हुए केंद्रीय माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) के मंत्री प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा, “प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान का प्रतिउत्तर देते हुए कई संस्थाओं ने प्रयास किये जिसमे आसार की इस पहल को बहुत बड़ा प्रयास मानता हूँ . ‘मैं ईबाइकगो और एएसएसआर को इस रणनीतिक साझेदारी के लिए बधाई देता हूंI हरित ऊर्जा समाधानों से प्रकृति के संरक्षण के साथ रोजगार के मौके बनाना और आर्थिक स्वतंत्रता के प्रति प्रेरित वाली इस साझेदारी का देश के स्थायी विकास पर सकारात्मक प्रभाव होगा और मैं इसे अपने माननीय प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम मानता हूं”..

इस गठजोड़ पर टिप्पणी करते हुए डॉ. टी इरफान खान, संस्थापक और सीईओ, ईबाइकगो ने कहा,  “इस गठजोड़ में हमारी दोहरी दिलचस्पी है। सबसे पहले तो यह भारत में ईवी को अपनाया की प्रक्रिया को तेज और आसान करता है और आत्मनिर्भर भारत की कल्पना को पूर्ण करने की दिशा में काम है. क्योंकि इससे  ईंधन के मामले में भारत की निर्भरता तेल आयात पर कम होगी, जिसका देश के सकल घरेलू उत्पाद पर सकारात्मक प्रभाव होगा। दूसरा फायदा यह है कि इससे तेजी से रोजगार बढ़ेंगे। किसी व्यावसायिक दुकान में 10 लाख रुपए के निवेश से ज्यादा से ज्यादा 3-4  लोगों को नौकरी मिलती है। पर ईबाइकगो के कारोबारी साझेदारी के जरिए 10 लाख रुपए का निवेश अगर इलेक्ट्रिक बाइक्स में किया जाए तो करीब 50 लोगों को नौकरी मिलती है। जिसमे 10वीं पास लोगों को भी 2 हफ्ते के प्रशिक्षण में डिलीवरी एक्जीक्यूटिव बना कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर किया जा सकता हैं।”

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इज़ आफ डूइंग बिज़नेस और साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए अभिजीत सिन्हा ने बताया की अस्सार पहले से जयपुर-दिल्ली-आगरा को भारत के पहले 500 km के ई-हाइवे से जोड़ने के लिए एन.एच.इ.वी. (NHEV) कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक कारों और बसों को एक्सप्रेसवे पर उतारने के काम में जुटी हुई है. उसमें इस नई साझेदारी से, अब इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहनों को भी बड़ी संख्या में शहरों में उतारा जा सकेगा। हाइवे पर बनने वाले चार्जिंग स्टेशन की लागत अमूमन 3  साल में निकलती है जबकि इन छोटे वाहनों को कहीं भी चार्ज किया जा सकता है और वाहन खरीदार की लागत भी इसके दूसरे साल में ही निकल जाती है और अगले दो साल तक और चलाने पर निवेशकों को सिर्फ किराये से ही 34% से ज्यादा रिटर्न मिलता है. ये कुल मिलाकर व्यावसायिक दृष्टिकोण से पर्यावरण, रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिए फायदे का सौदा है और एकसाथ कई लक्ष्यों को पूरा करता है.    

चंडीगढ़ मंगलवार 13 अक्टूबर – हरजिंदर चौहान

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